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Rudrapur:-निजी स्कूलों की मनमानी पर उबाल, फीस और ‘डोनेशन’ सिस्टम के खिलाफ प्रशासन को अल्टीमेटम

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रुद्रपुर – जनपद ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर में निजी स्कूलों द्वारा बढ़ती फीस, यूनिफॉर्म और किताबों के नाम पर की जा रही मनमानी वसूली के खिलाफ सोमवार को अभिभावकों, शिक्षकों, श्रमिक संगठनों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर उपजिला अधिकारी पंकज उपाध्याय को ज्ञापन सौंपा। सुब्रत कुमार विश्वास के नेतृत्व में दिए गए इस ज्ञापन में शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और व्यावसायीकरण पर कड़ी आपत्ति जताते हुए तत्काल नियंत्रण की मांग की गई।

ज्ञापन में कहा गया कि निजी स्कूल शिक्षा को सेवा के बजाय लाभ कमाने का माध्यम बना रहे हैं, जिससे आम और मध्यम वर्ग के परिवारों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। आरोप लगाया गया कि स्कूल प्रबंधन फीस, ड्रेस, परिवहन और अन्य शुल्कों के नाम पर अभिभावकों से मनमानी रकम वसूल रहा है, जबकि प्रशासन इस पर प्रभावी अंकुश लगाने में विफल साबित हो रहा है।

आंदोलनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर कोई पारदर्शी और ठोस नियंत्रण व्यवस्था नहीं है। हर वर्ष अचानक फीस बढ़ोतरी, अनावश्यक शुल्क और “डोनेशन” जैसी प्रथाएं आम होती जा रही हैं। सरकार द्वारा समय-समय पर समितियों और नियामक तंत्र की घोषणाएं की गईं, लेकिन उनका प्रभाव जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहा है।

ज्ञापन में बिना मान्यता के संचालित हो रहे शिक्षण संस्थानों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि ऐसे स्कूल छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और इनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।

इसके साथ ही स्कूलों में “किताब और यूनिफॉर्म की दलाली” पर भी गंभीर आरोप लगाए गए। अभिभावकों का कहना है कि उन्हें एक ही निर्धारित दुकान से महंगे दामों पर किताबें और ड्रेस खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।

सुब्रत कुमार विश्वास ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही प्रशासन द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को तेज करते हुए जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

इस दौरान इंकलाबी मजदूर केंद्र, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) से जुड़े कार्यकर्ता, छात्र नेता और समाजसेवी भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। प्रमुख रूप से दिनेश भट्ट, श्रीवास सरकार, मनीष गुप्ता, रजनीश गंगवार, दीपमाला, तपेश्वर चौहान, लालमोहन जोशो, संजय गंगवार, तापस बिस्वास, उत्तम दास, धीरज कुमार, गौतम मादक, गोपी सरकार, उत्तम कुमार, राजेश मंडल, दिनेश गंगवार और राजेश चौधरी शामिल रहे।

अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की कि निजी स्कूलों की फीस, किताबों और यूनिफॉर्म पर सख्त निगरानी के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए, शिकायतों का त्वरित निस्तारण हो और शिक्षा को पूरी तरह से जनहित से जोड़कर संचालित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा को व्यापार बनने से रोकना ही इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य है।

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