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देहरादून सम्मेलन में न्याय सुधारों पर मंथन, अंतिम पंक्ति तक न्याय पहुंचाने का संकल्प

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देहरादून – राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के तत्वाधान में उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित दो दिवसीय नॉर्थ जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का रविवार को देहरादून में समापन हो गया। इस वर्ष सम्मेलन का विषय “Enhancing Access to Justice” और मुख्य थीम “Justice Beyond Barriers: Rights, Rehabilitation & Reform for the Most Vulnerable” रही।

समापन अवसर पर गुरमीत सिंह, भारत के मुख्य न्यायाधीश एवं NALSA के संरक्षक सूर्यकांत, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सहित उच्चतम न्यायालय एवं विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायमूर्तिगण और विधि विशेषज्ञ मौजूद रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत मनोज कुमार गुप्ता के स्वागत संबोधन से हुई, जिसके बाद अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मेलन में राज्य के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के अध्यक्ष, सचिव और न्यायिक अधिकारियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।

दो दिनों तक चले इस सम्मेलन में न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने, वंचित वर्गों के अधिकारों के संरक्षण और न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने पर गहन मंथन हुआ। तकनीकी सत्रों में वन अधिकार अधिनियम 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन, जेल सुधार, विचाराधीन बंदियों के अधिकार, एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास और महिलाओं व बच्चों के विधिक अधिकार जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।

इस दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा “न्याय मित्र पोर्टल” का शुभारंभ किया गया, जिससे आमजन अब ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर त्वरित न्याय प्राप्त कर सकेंगे। वहीं NALSA के कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम नाथ ने एक ई-बुकलेट का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि न्याय व्यवस्था की सफलता तभी संभव है, जब यह समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक समयबद्ध रूप से पहुंचे। उन्होंने “जस्टिस बियॉन्ड बैरियर्स” की अवधारणा को रेखांकित करते हुए न्याय प्रक्रिया को सरल बनाने और उससे जुड़ी बाधाओं को दूर करने पर बल दिया।

उन्होंने सम्मेलन को अत्यंत प्रासंगिक बताते हुए आदिवासी समुदायों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास तथा कारागार सुधार जैसे विषयों पर गंभीर विचार-विमर्श को समय की आवश्यकता बताया। मुख्यमंत्री ने NALSA की विभिन्न योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि ये पहल वंचित वर्गों तक न्याय पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे ई-कोर्ट्स, नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड, फास्ट ट्रैक कोर्ट्स और डिजिटल केस मैनेजमेंट जैसे सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे न्याय प्रणाली अधिक पारदर्शी और सुलभ बन रही है। साथ ही राज्य सरकार भी डिजिटल कोर्ट्स, ई-फाइलिंग और वर्चुअल हियरिंग जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत कर न्याय व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

अंत में मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस सम्मेलन से प्राप्त सुझाव न केवल उत्तराखण्ड बल्कि पूरे देश के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे।

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