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Dehradun:-सूचना का अधिकार बना सुशासन की नींव, RTI के 20 साल पर 10 अधिकारियों को मिला सम्मान

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देहरादून – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के लागू होने के 20 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आज सचिवालय में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने RTI Act के तहत उत्कृष्ट एवं सराहनीय कार्य करने वाले 5 लोक सूचना अधिकारियों और 5 अपीलीय अधिकारियों को सम्मानित किया।

सम्मानित अधिकारियों में DM बागेश्वर आकांक्षा कोंडे (तत्कालीन CDO हरिद्वार), CDO देहरादून अभिनव शाह, SSP टिहरी आयुष अग्रवाल, उपसचिव लोक सेवा आयोग उत्तराखण्ड डॉ. प्रशांत, उप निदेशक प्रारंभिक शिक्षा एस.एस. चौहान, अनुसचिव उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग राजन नैथानी,

प्रभारी निरीक्षक कोतवाली पिथौरागढ़ ललित मोहन जोशी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रामनगर वन प्रभाग कमला शर्मा, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा लियाकत अली खान तथा DDO हरिद्वार वेद प्रकाश शामिल रहे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि RTI Act भारतीय लोकतंत्र की आत्मा और पारदर्शी शासन व्यवस्था की आधारशिला है। इस कानून ने शासन और नागरिकों के बीच विश्वास, पारदर्शिता और जवाबदेही को सशक्त बनाया है। RTI Act के माध्यम से प्रत्येक नागरिक को सरकारी नीतियों, निर्णयों और कार्यप्रणाली पर प्रश्न पूछने और जवाबदेही सुनिश्चित करने का अधिकार मिला है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की नई कार्यसंस्कृति विकसित हुई है। डिजिटल गवर्नेंस, ई-ऑफिस, ऑनलाइन पोर्टल, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और जन-सुनवाई जैसे माध्यमों ने शासन और जनता के बीच दूरी को कम किया है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड सरकार पारदर्शी, उत्तरदायी और जनोन्मुखी प्रशासन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य में प्रशासनिक प्रक्रियाओं का बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण किया गया है और अधिकांश सरकारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे आम नागरिकों को सूचना और सेवाओं की आसान पहुंच सुनिश्चित हुई है।

मुख्यमंत्री ने RTI ऑनलाइन पोर्टल और राज्य सूचना आयोग की हाइब्रिड सुनवाई व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि इससे न्याय प्रक्रिया अधिक सुलभ और प्रभावी बनी है। उन्होंने बताया कि अब तक राज्य सूचना आयोग में 13 लाख से अधिक RTI आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें से अधिकांश का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है। वर्तमान में केवल 700 प्रकरण लंबित हैं, जो आयोग की कार्यकुशलता का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि RTI जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही इसके उपयोग में जिम्मेदारी भी आवश्यक है। कुछ मामलों में इसके दुरुपयोग की प्रवृत्ति सामने आई है, जिसे रोकने के लिए जनजागरूकता बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक विभाग उन सूचनाओं को अपनी वेबसाइट पर नियमित रूप से प्रदर्शित करे, जिनकी बार-बार मांग की जाती है, ताकि नागरिकों को स्वतः जानकारी मिल सके और पारदर्शिता को बढ़ावा मिले।

कार्यक्रम में मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी, राज्य सूचना आयुक्त देवेंद्र कुमार आर्य, दलीप सिंह कुंवर, कुशलानंद, उत्तराखण्ड अवस्थापन अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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