Haldwani:-13 साल से रिसीवर प्रबंधन के सहारे चल रहे सिख समाज के दो बड़े शिक्षण संस्थान, हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं हुए चुनाव

हल्द्वानी। श्री गुरु तेग बहादुर सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल एवं खालसा नेशनल गर्ल्स इंटर कॉलेज में पिछले 13 वर्षों से रिसीवर प्रबंधन लागू होने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। समाजसेवी जगमीत सिंह मीती ने आरोप लगाया है कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद दोनों संस्थाओं में प्रबंधन समिति के चुनाव अब तक नहीं कराए गए हैं।
जगमीत सिंह मीती के अनुसार, कुछ वर्ष पूर्व संस्थाओं के प्रबंधन को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था, जिसके बाद रिसीवर की नियुक्ति की गई। उनका आरोप है कि इस दौरान कुछ लोगों द्वारा अनधिकृत रूप से आम सभा बुलाकर स्वयं को अध्यक्ष घोषित करने का प्रयास भी किया गया, जिसके खिलाफ मामला न्यायालय तक पहुंचा।
मीती का कहना है कि मामले में संबंधित पक्ष न्यायालयों से राहत न मिलने के बाद उच्च न्यायालय पहुंचा, जबकि समाज के वरिष्ठ लोगों और युवाओं द्वारा कई बार आपसी सहमति से समाधान निकालने का प्रयास भी किया गया। हालांकि, कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका।
उन्होंने बताया कि मामले को लेकर उन्होंने राजभवन, मुख्य सचिव, जिला प्रशासन, नगर मजिस्ट्रेट, शिक्षा विभाग और अन्य अधिकारियों से लगातार संपर्क किया। इसके बाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई।
बताया गया कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 5 जनवरी 2026 को पारित आदेश में सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिए थे कि यदि चुनाव कराने में कोई कानूनी बाधा नहीं है तो सदस्यता प्रक्रिया पूरी कर छह माह के भीतर चुनाव संपन्न कराए जाएं।
इस संबंध में नगर मजिस्ट्रेट हल्द्वानी द्वारा 22 जनवरी 2026 को मुख्य शिक्षाधिकारी नैनीताल को पत्र भेजकर उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए थे। पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी तथा उप निबंधक फर्म्स सोसाइटीज एंड चिट्स को भी प्रेषित की गई थी।
जगमीत सिंह मीती का आरोप है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई है और मामले में अनावश्यक विलंब हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा में चुनाव नहीं कराए गए तो न्यायालय में अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई के लिए आवेदन किया जाएगा।फिलहाल, दोनों शिक्षण संस्थानों के चुनाव और प्रबंधन को लेकर सिख समाज की नजरें प्रशासन और संबंधित विभागों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।





