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राजभवन में कार्यक्रम— “प्रहरी बनकर सेवा करें, पर्यावरण बचाएँ, पर्यटन संवारे”: विशेषज्ञों की एकजुट अपील

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राजभवन में ‘विमर्श’ कार्यक्रम: सुरक्षा, पर्यावरण और पर्यटन पर साझा दृष्टिकोण

राजभवन में सुरक्षा, पर्यावरणीय चुनौतियों और पर्यटन के भविष्य पर केंद्रित “विमर्श” कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवा प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य फोकस उत्तराखण्ड को सुरक्षित, हरित और पर्यटन की दृष्टि से अधिक समृद्ध बनाने पर रहा।

कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने कहा कि उत्तराखण्ड की सुरक्षा में हर नागरिक को प्रहरी बनकर योगदान देना होगा। संवेदनशील भौगोलिक परिस्थितियों के बीच सुरक्षा जागरूकता और समुदाय आधारित सतर्कता बेहद आवश्यक है। वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण को उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ते हुए संतों की विरासत को अपनाने की अपील की।

पर्यटन के क्षेत्र में ‘अतिथि देवो भव:’ की भावना को मजबूती देने, स्थानीय स्तर पर नए पर्यटन स्थल विकसित करने और सुरक्षित व सुगम पर्यटन पथ तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया। विमर्श में कहा गया कि विकसित भारत और समृद्ध उत्तराखण्ड की दिशा में दृढ़ नेतृत्व, युवा शक्ति और जनभागीदारी, राज्य की सबसे बड़ी ताकत हैं।

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि उत्तराखण्ड का भविष्य सुरक्षा जागरूकता, पर्यावरण संतुलन और पर्यटन के विविधीकरण पर आधारित होगा। कार्यक्रम में स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष के समाधान, वनों के पुनर्जीवन, ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने और जनसहभागिता को मजबूत करने पर ठोस सुझाव सामने आए।

कार्यक्रम के दौरान यह भी माना गया कि सामूहिक प्रयासों, नीति समर्थन और जनजागरूकता के साथ उत्तराखण्ड बहुत जल्द इन प्रमुख क्षेत्रों में देश का अग्रणी राज्य बन सकता है। विमर्श का समापन ‘सतत विकास ही उत्तराखण्ड का भविष्य’ मंत्र के साथ हुआ।

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