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लालकुआं में सजी रूहानी महफिल, उलेमाओं ने दिया मोहब्बत, सब्र और भाईचारे का पैगाम

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लालकुआं – तंजीम-ए-रजा कमेटी के तत्वावधान में आयोजित ‘शहीद-ए-आज़म कांफ्रेंस’ आध्यात्मिक और श्रद्धामय वातावरण में संपन्न हुई। कांफ्रेंस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर हजरत इमाम हुसैन की शहादत को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।

कांफ्रेंस का मुख्य उद्देश्य हजरत इमाम हुसैन की शहादत, त्याग, संघर्ष और इंसाफ के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना रहा। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे उलेमा-ए-किराम और शायरों ने अपने संबोधनों में कहा कि इमाम हुसैन की कुर्बानी पूरी इंसानियत के लिए एक अमिट मिसाल है। उन्होंने कहा कि सच्चाई, सब्र, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए अपनाया गया उनका मार्ग आज भी समाज को सही दिशा प्रदान करता है।

कार्यक्रम के दौरान नातिया कलाम और मनकबत पेश की गईं, जिससे माहौल पूरी तरह रूहानी और भावनात्मक हो उठा। वक्ताओं ने समाज में आपसी भाईचारे, शांति और सद्भाव को मजबूत बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान समय में इमाम हुसैन की शिक्षाएं और अधिक प्रासंगिक हो गई हैं।

कांफ्रेंस में मौलाना अलाउद्दीन चतुर्वेदी (झारखंड), मुफ्ती तौसीफ नूरानी (बरेली शरीफ), मौलाना जफर बज़्मी (शीशगढ़), मौलाना सलीम रजा पीलीभीती (शायर-ए-मुल्क), मौलाना मुफ्ती वासिफ रजा (हल्द्वानी), मौलाना अब्दुल हफीज (लालकुआं) तथा मौलाना हसीन रजा (इमाम जामा मस्जिद) सहित अनेक प्रतिष्ठित उलेमा और धर्मगुरुओं ने शिरकत कर अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम को सफल बनाने में तंजीम-ए-रजा कमेटी के अध्यक्ष मुख्तार अहमद अंसारी सहित कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अंत में सलातो-सलाम के साथ देश में अमन-चैन, खुशहाली और तरक्की की दुआ की गई तथा कांफ्रेंस का समापन हुआ।

 

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