स्थायी लोक अदालत की सुविधाओं से आमजन को मिलेगा त्वरित और निशुल्क न्याय

नैनीताल – उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के दिशा-निर्देशों तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला न्यायाधीश प्रशांत जोशी के आदेशानुसार सोमवार को पीएलवी/अधिकार मित्रों के लिए स्थायी लोक अदालत के संबंध में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में स्थायी लोक अदालत के सदस्यों ने प्रतिभागियों को इसकी कार्यप्रणाली, अधिकार क्षेत्र और आमजन को मिलने वाले लाभों की विस्तार से जानकारी दी।
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पारुल थपलियाल के निर्देश पर आयोजित प्रशिक्षण का उद्देश्य स्थायी लोक अदालत की व्यवस्था को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना रहा। प्रशिक्षण के दौरान “न्याय सबके लिए कितना आसान, तुरंत समस्या का समाधान” के मंत्र के साथ आमजन को शीघ्र, सस्ता और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने की व्यवस्था के बारे में बताया गया।
बिना न्याय शुल्क के दाखिल किया जा सकता है प्रार्थना पत्र
प्रशिक्षण में बताया गया कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 22-बी के तहत जनपद नैनीताल में स्थायी लोक अदालत का गठन किया गया है। कोई भी व्यक्ति अदालती मुकदमेबाजी से पहले सीधे स्थायी लोक अदालत में प्रार्थना पत्र देकर अपने विवाद का समाधान प्राप्त कर सकता है। यहां कोई न्याय शुल्क नहीं लिया जाता और विवादों का अपेक्षाकृत कम समय में निस्तारण किया जाता है।
स्थायी लोक अदालत के निर्णय को अंतिम और पक्षकारों पर बाध्यकारी बताया गया। प्रशिक्षण में यह भी जानकारी दी गई कि जन उपयोगी सेवाओं से जुड़े ऐसे मामले, जिनमें विवाद की अधिकतम राशि एक करोड़ रुपये तक हो और जो किसी अन्य न्यायालय में लंबित न हों, स्थायी लोक अदालत में प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
इन सेवाओं से जुड़े मामलों का हो सकता है निस्तारण
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि स्थायी लोक अदालत के दायरे में परिवहन सेवाएं, डाक, तार एवं टेलीफोन सेवाएं, विद्युत, प्रकाश एवं जल आपूर्ति, लोक सफाई एवं स्वच्छता व्यवस्था, अस्पताल एवं औषधालय सेवाएं, बीमा, शैक्षणिक संस्थान, आवास एवं भू-संपदा तथा बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं से जुड़े मामले आ सकते हैं।
उपभोक्ता फोरम से अलग है व्यवस्था
पीएलवी और अधिकार मित्रों को स्थायी लोक अदालत तथा उपभोक्ता फोरम के बीच अंतर की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि उपभोक्ता फोरम में मुख्य रूप से सेवा में कमी से संबंधित उपभोक्ता विवादों की सुनवाई होती है, जबकि स्थायी लोक अदालत में जन उपयोगी सेवाओं से जुड़े मामलों में प्रतिकार, धन की वसूली तथा संबंधित शमनीय आपराधिक मामलों का भी निस्तारण किया जा सकता है।
लोक अदालत और स्थायी लोक अदालत में भी समझाया अंतर
प्रशिक्षण में लोक अदालत और स्थायी लोक अदालत की कार्यप्रणाली में अंतर भी बताया गया। लोक अदालत में यदि पक्षकारों के बीच सुलह-समझौता नहीं हो पाता तो मामला संबंधित न्यायालय को वापस कर दिया जाता है। वहीं स्थायी लोक अदालत में जन उपयोगी सेवाओं से जुड़े मामलों में सुलह विफल होने की स्थिति में स्थायी लोक अदालत स्वयं मामले का गुण-दोष के आधार पर निस्तारण कर सकती है।
प्रशिक्षण के माध्यम से पीएलवी एवं अधिकार मित्रों को निर्देशित किया गया कि वे स्थायी लोक अदालत की सुविधाओं और प्रक्रिया की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं, ताकि आमजन बिना लंबी मुकदमेबाजी और अतिरिक्त खर्च के अपने विवादों का त्वरित समाधान प्राप्त कर सकें।




