नंदा देवी मंदिर पहुंचे राज्यपाल, सरमोली के होमस्टे मॉडल और महिला समूहों की जमकर सराहना

मुनस्यारी – नैनीताल – उत्तराखण्ड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने अपने दो दिवसीय मुनस्यारी भ्रमण के दौरान प्रसिद्ध नंदा देवी मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश एवं क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में संचालित पर्यटन गतिविधियों का अवलोकन करते हुए स्थानीय विकास कार्यों और पर्यटन सुविधाओं की सराहना की।
राज्यपाल ने नंदा देवी मंदिर परिसर एवं आसपास विकसित पर्यटन व्यवस्थाओं को सराहनीय बताते हुए जिला प्रशासन को बधाई दी। जिला प्रशासन की ओर से उन्हें मुनस्यारी विकासखंड में विकसित हो रही पर्यटन गतिविधियों, मिलम, खलिया टॉप, बिर्थी, पंचाचूली क्षेत्र सहित अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने नंदा देवी मंदिर समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों से मुलाकात कर धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं और मंदिर व्यवस्थाओं पर चर्चा की।
भ्रमण के दौरान राज्यपाल ने विभिन्न विभागों एवं जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने स्थानीय स्तर पर किए जा रहे नवाचारों और विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों का संरक्षण एवं प्रभावी विपणन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मंदिर परिसर में लगे महिला स्वयं सहायता समूहों के स्टॉलों का अवलोकन करते हुए उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांडिंग और विपणन संबंधी जानकारी भी प्राप्त की।
राज्यपाल ने स्थानीय महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों से संवाद करते हुए उनके स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि महिला समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
इसके बाद राज्यपाल ने वर्ष 2023 में ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज’ पुरस्कार से सम्मानित सरमोली ग्राम पंचायत का भ्रमण किया। उन्होंने सरमोली के सामुदायिक पर्यटन एवं होमस्टे मॉडल को महिला सशक्तीकरण और सतत पर्यटन विकास का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यहां स्थानीय समुदाय, विशेषकर महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से पर्यटन को आजीविका और पर्यावरण संरक्षण से प्रभावी रूप से जोड़ा गया है।
राज्यपाल ने कहा कि सरमोली ने सामुदायिक सहभागिता और सतत विकास पर आधारित ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। उन्होंने ग्रामवासियों, महिला समूहों और होमस्टे संचालकों को बधाई देते हुए कहा कि उनके सामूहिक प्रयासों ने सरमोली को पर्यटन के क्षेत्र में विशेष पहचान दिलाई है।
उन्होंने स्थानीय महिलाओं द्वारा पारंपरिक उत्पादों, लोक संस्कृति, स्थानीय खान-पान और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रयासों की सराहना करते हुए लोक संस्कृति के निरंतर प्रचार-प्रसार का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि सरमोली का यह मॉडल स्थानीय युवाओं और महिलाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ पर्यटकों को उत्तराखण्ड की समृद्ध संस्कृति और ग्रामीण जीवनशैली से परिचित करा रहा है।
राज्यपाल ने होमस्टे संचालकों से भी मुलाकात कर उनके अनुभवों और समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मुनस्यारी नगर क्षेत्र में लगभग 120 होमस्टे संचालित हो रहे हैं, जबकि 32 होटल, एक दर्जन से अधिक लॉज, तीन गेस्ट हाउस और 50 से अधिक टेंट पर्यटकों को आवासीय सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मुनस्यारी में पर्यटन, संस्कृति, प्रकृति और स्थानीय आजीविकाओं का अनूठा संगम देखने को मिलता है। यहां के होमस्टे, स्थानीय उत्पाद और महिला स्वयं सहायता समूह न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं, बल्कि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान भी दिला रहे हैं।





