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Haldwani:-2014 काशिश हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट से आरोपी बरी होने पर हल्द्वानी में विरोध प्रदर्शन

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हल्द्वानी। वर्ष 2014 के दिल दहला देने वाली मासूम काशिश हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट से मुख्य आरोपी अख्तर अली को सबूतों के अभाव में बरी किए जाने के बाद हल्द्वानी की सड़कों पर जबरदस्त आक्रोश फूट पड़ा। गुरुवार को बुद्ध पार्क से लेकर सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय तक भारी भीड़ उमड़ी, जहां सामाजिक संगठनों, महिलाओं, स्थानीय लोगों और उत्तराखंड के नामचीन लोक कलाकारों ने एकजुट होकर आरोपी को फांसी की सजा दिलाने की मांग की। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने सरकार और न्यायपालिका के ताज़ा फैसले पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि इस निर्णय ने पीड़ित परिवार की उम्मीदों को तोड़ दिया है।प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब निचली अदालत और हाईकोर्ट ने आरोपी को दोषी मानकर सजा सुनाई थी, तो सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद थी कि वह पीड़ित परिवार को न्याय दिलाएगा, लेकिन हालिया आदेश से जनता गहरे सदमे और गुस्से में है। धरना-प्रदर्शन के दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच जमकर नोकझोंक भी हुई। बुद्ध पार्क से जुलूस की शक्ल में आगे बढ़ते प्रदर्शनकारियों को पुलिस रोकने की कोशिश करती रही, लेकिन भीड़ के आगे प्रशासन की एक न चली और सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि आरोपी को फांसी की सजा नहीं दी गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इस दौरान हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश ने भी आंदोलन को समर्थन दिया। वहीं, उत्तराखंड की लोकप्रिय लोक कलाकार श्वेता महरा, इंदर आर्य, प्रियंका मेहरा और गोविंद दिगारी भी धरना स्थल पर पहुंचे और जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की। महिलाओं ने हाथों में बैनर उठाकर न्याय के लिए जमकर नारेबाजी की और कहा कि बेटियों की अस्मिता से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। गौरतलब है कि नवंबर 2014 में पिथौरागढ़ निवासी सात वर्षीय काशिश काठगोदाम में रिश्तेदार की शादी में शामिल होने आई थी। शादी के दौरान बच्ची अचानक लापता हो गई और पांच दिन बाद उसका शव गौला नदी किनारे जंगल में मिला। जांच में सामने आया कि मासूम के साथ पहले दुष्कर्म किया गया और फिर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें से एक को पहले ही दोषमुक्त कर दिया गया, जबकि मुख्य आरोपी अख्तर अली को निचली अदालत और हाईकोर्ट से मौत की सजा मिली थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उसे बरी कर दिया, जिसके बाद पूरे उत्तराखंड में उबाल है।

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