Lalkuan:- जोखिमों के बीच सच की आवाज बनी पत्रकारिता, हिंदी पत्रकारिता दिवस पर वक्ताओं ने रखे विचार

लालकुआँ – उत्तराखण्ड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन द्वारा शनिवार को हिंदी पत्रकारिता दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर “पत्रकारिता का बदलता स्वरूप” विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने पत्रकारिता की वर्तमान चुनौतियों, निष्पक्षता और सामाजिक जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल डॉ. मंजूनाथ टी.सी. एवं जिला सूचना अधिकारी गिरिजा शंकर जोशी द्वारा मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पत्रकार, बुद्धिजीवी एवं सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारिता का मार्ग हमेशा से कठिन, चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा रहा है। यह केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने की एक साधना और मिशन है। वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में पत्रकारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी निष्ठा, ईमानदारी और निष्पक्षता को बनाए रखने की है।
उन्होंने कहा कि सच्ची पत्रकारिता कभी व्यापार नहीं हो सकती। यदि पत्रकारिता व्यवसाय बन जाती है तो समाज दिशाहीन होने लगता है। वक्ताओं ने बिना तथ्यों के सनसनी फैलाने वाली पत्रकारिता की आलोचना करते हुए कहा कि पत्रकारों को हमेशा सत्य और जिम्मेदारी के साथ कार्य करना चाहिए।
इस दौरान हिंदी पत्रकारिता के इतिहास को भी याद किया गया। वक्ताओं ने बताया कि पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने वर्ष 1826 में देश के पहले हिंदी समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ का प्रकाशन कर हिंदी पत्रकारिता की मजबूत नींव रखी थी। उनके साहस और निर्भीकता को आज भी पत्रकारिता जगत के लिए प्रेरणा माना जाता है।
वक्ताओं ने कहा कि अंग्रेजी शासनकाल में भी पत्रकारिता की ताकत से सरकार भयभीत रहती थी। पत्रकारिता को दबाने के लिए अनेक कठोर कानून बनाए गए, लेकिन निडर और संघर्षशील पत्रकारों ने हर चुनौती का सामना किया और देश की आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में पत्रकारिता क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पत्रकारों और लेखकों को संगठन की ओर से शॉल एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। अंत में सभी अतिथियों एवं वक्ताओं ने पत्रकारिता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।





