उत्तराखण्डउधम सिंह नगर

Udham singh nagar:-मोहन खेड़ा के नामांकन में नही दिखे कांग्रेस के चेहरे,जमीनी कांग्रेसियों ने की बैठक बोले अपमान का बदला लिया जाएगा – सूत्र

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ऊधम सिंह नगर – जिला मुख्यालय रुद्रपुर में बरसों से कांग्रेस का वजन ढोह रहे हैं वरिष्ठ कांग्रेसियों का दर्द आखिकार लबों पर आ ही गया सूत्रों के अनुसार आज अपने अपमान को लेकर एक बैठक की कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के निजी आवास पर हुई,जमीनी स्तर पर कांग्रेस से जुड़े वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं ने इस बैठक में हिस्सा लिया कांग्रेस के केडर वोट की बात करें तो आज यह वोट भी कांग्रेस से छिटकता हुआ नजर आ रहा है ऐसे में अगर कांग्रेस का मूल वोट ही पार्टी से छिटक जाता है तो जीत की संभावनाएं क्षीण दिखाई देती हैं,दरअसल टिकट वितरण से लेकर अबतक की किसी भी प्रक्रिया में किसी भी वरिष्ठ कांग्रेसी नेता को कोई तरजीह ही नहीं दी गई बल्कि कांग्रेस के इन नेताओ को दुत्कारा जाता रहा जिससे पूरे कांग्रेस परिवार में आक्रोश उत्पन्न हो गया उम्मीदवारों के चयन में इन वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं से किसी तरह की राय शुमारी नहीं की और न ही कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक बुलाया ही गया जबकि विगत के हर चुनाव में एक प्रिक्रिया अपनाई जाती थी राय मशविरा किया जाता था टिकट वितरण से पहले छानबीन करने के लिए सीनियरों का पैनल बैठता था धरातल पर जा कर प्रत्याशियों की स्थितियों का आंकलन करने के बाद टिकट दिए जाते थे लेकिन इस बार एक कमरे में बैठकर चार पांच नोसिखियों ने होचपोच कर टिकट घोषित करके पूरी कांग्रेस को तबाह करने की इबारत लिख दी इसके पीछे पूर्व पालिकाध्यक्ष मीना शर्मा की महत्वकांक्षा और निजी हित भी बताए जाने लगे हैं,कांग्रेसियों का तो यह भी कहना है कि कांग्रेस के जिम्मेदार बन बैठे इन लोगों ने सत्ता पक्ष यानी विपक्षी पार्टी भाजपा की मंशा के अनुसार टिकट बांट कर पार्टी को डुबोने की सुपारी लेकर यह काम किया है,आरोप गंभीर है जिसकी असलियत चुनावों के परिणामों के बाद खुद सामने आ जाएगी

लेकिन सवाल यह है कि इन मठाधीशों ने निकाय चुनावों में इन नेताओं ने बिना किसी गहन अध्ययन के उस पर अपनी मुहर लगा कैसे दी, कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने तो यहां तक कहा कि कांग्रेस के इन चंद लोगों ने अपने अपने पदों का दुरुपयोग कर जिन प्रत्याशियों को टिकटें दी हैं और टिकट काटने में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के नाम का भी बेजा इस्तमाल कर झूठ बोला पार्टी के जिम्मेदार इन नेताओं के खुद के किरदार गिरवी में रखे हुए हैं,

सूत्रों की मानें तो कांग्रेस ने जिस उम्मीदवार को मेयर का टिकट दिया है उनके नामांकन दाखिल करने में इन कांग्रेसियों की गैरमौजूदगी खुद में बड़े सवाल खड़े कर रही है यहां तक कि एक विशेष वरिष्ठ कांग्रेसी नेता तो मीडिया के सामने मेयर के दावेदार के नामांकन में इस लिए शामिल होने की बात को सिरे से खारिज कर दिया कि उन्हें नामांकन तक में बुलाया ही नहीं गया, अब इन वरिष्ठ कांग्रेसियों ने अपने अपमान का बदला लेने की बात कही है,

लेकिन वो बदला किस रूप में लेंगे यह एक बड़ा सवाल है, क्षेत्र की राजनीति और इस निकाय चुनाव में पहली बार ऐसे समीकरण दिखाई दे रहे हैं कि पहली बार अल्पसंख्यक समुदाय जिसे कांग्रेस का मूल वोट माना जाता था वो भी कांग्रेस से दूर जाता दिख रहा है,इसके पीछे स्पष्ट कारण जो दिख रहे हैं वो कांग्रेस के तीन चार वो मुस्लिम चेहरे जो देखने भालने में बेशक सुंदर दिखाई देते हैं लेकिन उन्होंने पार्टी के नगर और जिलाध्यक्ष को गुमराह करके जमीनी हकीकत से रूबरू नही होने दिया और स्वर्ण मृग दिखाकर और मुस्लिम वोटों के ठेकेदार बनकर पार्टी को बर्बाद करने में भूमिका निभाई,इन चेहरों को मुस्लिम समाज पहले ही चापलूस और मक्कारों की संज्ञा देता है,

फिलहाल आज जो भी तर्क दिखाई दिए उससे एक बात पूरी तरह साफ हो गई है कि कांग्रेस की नैय्या इस्बार पार लगने के मुड़ में लगती नही दिखती बल्कि रुद्रपुर में पार्टी दशकों पीछे चली जायेगी और इस दंश को कांग्रेस झेल नही पाएगी

आम चर्चा के मुताबिक कांग्रेस के गिने-चुने चार पांच मठाधीशों ने सत्ताधारी पार्टी से सांठगांठ कर ली है तथा कांग्रेस को गर्त में मिलाने का मंसूबा बना दिया है, कांग्रेस के मूल मुस्लिम वोट खिसक जाने का कारण, राजकुमार ठुकराल के मैदान में आने और निर्दलीय उम्मीदवार नूर अहमद के नामांकन दाखिल कर देने से मुस्लिम समुदाय को कांग्रेस के विरुद्ध एक मजबूत विकल्प मिल जाना भी माना जा रहा है,

हर मोर्चे पर विफल होती दिख रही कांग्रेस में जल्द ही ऐसे बुनियादी नेताओं के इस्तीफों का दौर शुरू होने की संभावना है जो कांग्रेस में बांध की तरह काम करते रहे हैं, यदि ऐसा हुआ तो यह कांग्रेस में पहली बार होगा इसके लिए जिम्मेदार नौसिखिए और अनुभवहीन स्थानीय नेतृत्व को ही माना जायेगा जिसपर भाजपा से सुपारी लेने के आरोप पार्टी के ही लोग लगा रहे हैं

सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता अपनी जेबों में इस्तीफा लेकर मौका देख रहे हैं ऐसे में स्थित विस्फोट बन सकती है।

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Mohd Uves

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