नैनीताल में दूषित पानी का कहर: दर्जनों बीमार, 5 स्कूलों में तीन दिन की छुट्टी

नैनीताल – उत्तराखण्ड में नैनीताल से जुड़े गांव के लोग तिल तिल कर दूषित पानी पीकर मरने को मजबूर हैं। कुछ गांवों में पहले ही पीलिया और डायरिया जैसी बीमारियों के फैलने के बाद अब कुछ अन्य गांव में इसकी चपेट में आ गए हैं।
गांव के दर्जनों लोग अलग अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। जल संस्थान पानी और सीवर सप्लाई को अलग अलग करने के साथ टंकियों में क्लोरीन छिड़क रहा है। जनहित को देखते हुए मुख्य शिक्षाधिकारी ने इस क्षेत्र के 5 स्कूलों में एक से तीन सितंबर तक छुट्टी की।
नैनीताल में तल्लीताल के निचले क्षेत्र कृष्णापुर और दुर्गापुर से लगे वीरभट्टी, गांजा, छिंडां मल्ला, बगरीखोड़, छिंडां तल्ला आदि गांव के 50प्रतिशत लोग दूषित पेयजल संबंधी बीमारियों के शिकार हो गए थे। बीती 13 अगस्त को निजी स्कूल के छात्रों के पीलिया ग्रसित मिलने के बाद स्कूल बंद होने और गांव के पानी संबंधी समस्याएं सामने आई थी।
इसके बाद से ही इसपर बड़े पैमाने पर चर्चाएं और सुधार कार्य होने लगे थे। जल संस्थान ने पानी की गुणवत्ता चैक की तो उसमें सीवेज का मिक्स होना पाया गया। इसके बाद विभाग ने स्कूल में ट्रीटमेंट शुरू करवाया और साथ में सीवेज और पेयजल की लाइनों को चैक कर अलग अलग किया।
ज्यूलिकोट के आसपास, पिछले कुछ दिनों से क्षेत्रवासियों के लगातार बीमार होने से ग्रामीण आक्रोशित हो गए और उन्होंने आज नैनीताल से दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।
अपना दर्द बताते हुए उन्होंने कहा की कुछ गांवों में दूषित पेयजल सप्लाई हो रही है। वहां के लोग बीमार हो रहे हैं। ज्यूलिकोट का रहने वाला 7 वर्षीय रुद्रा बरेली के श्रीराम मूर्ति अस्पताल में भर्ती है। उसे पीने के पानी से लिवर संबंधी गंभीर बीमारी हो गई है। धरनास्थल पर पर बैठी ज्यूलिकोट निवासी ख़िलावती ने बताया कि उसके दो बच्चे पेट संबंधी बीमारी के चलते नैनीताल के बीड़ी पाण्डे अस्पताल में भर्ती हैं। इसमें उनका बेटा 17 वर्षीय अस्मित और 20 वर्षीय बेटी वंशिका को शुक्रवार को एडमिट कराया था। उनके टैस्ट हो रहे हैं और इलाज के साथ ड्रिप लगी है।
डॉक्टर ने उन्हें इंफेक्शन बताया है। इनके अलावा, ज्यूलिकोट निवासी 26 वर्षीय देव जोशी हल्द्वानी के उजाला सिग्निस अस्पताल के आई.सी.यू.में एडमिट हैं। उसकी एस.जी.पी.टी.13,000 पहुँच गई है। वीरभट्टी निवासी 20 वर्षीय प्रियंका आर्या पेट संबंधी परेशानियों से जूझ रही हैं।
वो आज ही नैनीताल के बी.ड़ी.पाण्डे अस्पताल से 6 दिनों के बाद डिस्चार्ज होकर घर पहुंची है। प्रियंका का 19 वर्षीय भाई हर्षवर्धन भी पीलिया से पीड़ित है। इनके पिता विनोद चंद आर्या ने बताया की दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसमें प्रियंका एक सप्ताह और हर्षवर्धन दो दिन एडमिट रहा।
सेंट्रल हॉस्पिटल में 19 वर्षीय निहारिका और उसकी माँ 40 वर्षीय शीतल के साथ भावेश, अस्मित, राहुल व अन्य भी विभिन्न अस्पतालों के आई.सी.यू.में एडमिट हैं। गांव के दर्जनों लोग हर रोज अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि ज्यूलिकोट के साथ वर्गोंमोंट, गांजा, छीड़ा, वीरभट्टी, कृष्णापुर, साडियाताल, तल्ला बेलुवाखान, मल्ला बेलुवाखान, देवलडूंगा आदि क्षेत्रों में दूषित पेयजल आपूर्ति से ये पेट संबंधी बीमारियां पैदा हो रही हैं।
दूषित पानी से पीलिया, टाइफाइड, डायरिया, उल्टी, बुखार, दस्त जैसी बीमारियां हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी की सप्लाई मुख्यतः दुर्गापुर जल स्रोत से होती है।
इसके समीप ही सीवर टैंक की लीकेज भी है जो आपस में मिल जाते हैं और इससे ही ये बीमारियां पैदा हो रही हैं। उन्होंने दावा किया है कि आज सोमवार को पी.एच.सी.सेंटर गांजा में पेट संबंधी बीमारियां को लेकर कुल 110 लोगों ने चैक करवाया। धरने में बी.टी.सी.मेंबर हिमांशु पाण्डे और मंनोज चनियाल के साथ क्षेत्र के कई नाराज़ लोग धरने पर बैठे।
पेयजल विभाग के ईई अनीश पिल्लई का कहना है कि उन्होंने इस समस्या के सामने आने के बाद, इसके निवारण के लिए टीमें बनाई। उन्होंने सबसे पहले सीवर और पेयजल की लाइनों को अलग अलग किया। इसके बाद उन्होंने टैंक साफ करके उसमें क्लोरीन डाला। अब उनकी टीम घर घर जाकर पानी की टंकी में क्लोरीन का छिड़काव कर रही है।
ब्लॉक प्रमुख हरीश बिष्ट के पत्र का संज्ञान लेते हुए मुख्य शिक्षाधिकारी ने सी.डी.ओ.के निर्देश पर छात्रहित/जनहित को देखते हुए ज्यूलिकोट के 5 सरकारी और निजी स्कूलों में 1, 2 और 3 सितंबर को अवकाश घोषित कर दिया है। इस ख़बर के लिए हेडलाइन बना दीजिए




